नयी दिल्ली : सुप्रीम कोर्ट ने विधवाओं के अधिकारों को लेकर एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। शीर्ष अदालत ने स्पष्ट किया है कि यदि किसी महिला के पति की मृत्यु उसके ससुर के निधन के बाद होती है और वह विधवा हो जाती है, तब भी उसे अपने ससुर की संपत्ति से भरण-पोषण का अधिकार प्राप्त होगा।मंगलवार को इस मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस पंकज मिथल और जस्टिस एस.वी.एन. भट्टी की पीठ ने कहा कि पति की मृत्यु का समय—चाहे वह ससुर के निधन से पहले हो या बाद में—महिला की निर्भरता तय करने में कोई महत्व नहीं रखता। यह अधिकार हिंदू दत्तक ग्रहण एवं भरण-पोषण अधिनियम, 1956 के अंतर्गत मिलता है।यह मामला मृतक महेंद्र प्रसाद की संपत्ति से जुड़े पारिवारिक विवाद से संबंधित था। महेंद्र प्रसाद का निधन दिसंबर 2021 में हुआ था, जबकि उनके पुत्र रंजीत शर्मा का मार्च 2023 में देहांत हो गया। रंजीत शर्मा की मृत्यु के बाद उनकी विधवा गीता शर्मा ने ससुर की संपत्ति से भरण-पोषण की मांग करते हुए परिवार न्यायालय में याचिका दायर की थी।सुप्रीम कोर्ट ने इस याचिका को न्यायसंगत मानते हुए कहा कि विधवा महिला को सम्मानपूर्वक जीवन यापन का अधिकार है और परिवार की संपत्ति से उसका भरण-पोषण सुनिश्चित किया जाना चाहिए। यह फैसला विधवाओं के सामाजिक और कानूनी अधिकारों को मजबूती प्रदान करने वाला माना जा रहा है।