मणिकर्णिका में ही जलेगी चिता, मंदिर परिसर में खेलेगी भस्म की होलीघाट क्षेत्र में नहीं मिलेगी अनुमति, निर्माण कार्य और भीड़ नियंत्रण के चलते प्रशासन सख्तवाराणसी। रंगभरी एकादशी के दूसरे दिन होने वाली परंपरागत चिता भस्म की होली इस वर्ष केवल मणिकर्णिका मंदिर परिसर में ही आयोजित की जाएगी। घाट क्षेत्र में भस्म की होली खेलने की अनुमति नहीं दी गई है। प्रशासन और नगर निगम ने स्पष्ट किया है कि घाट पर चल रहे निर्माण कार्य और संभावित भीड़ को देखते हुए यह निर्णय लिया गया है।दोपहर 12 बजे जलेगी चितामंदिर प्रबंधन के अनुसार शनिवार दोपहर 12 बजे मणिकर्णिका मंदिर परिसर में चिता भस्म की होली परंपरागत रीति से खेली जाएगी। वर्षों से चली आ रही इस परंपरा में विभिन्न अखाड़ों के साधु-संत शामिल होते हैं। आयोजन को विधि-विधान और अनुशासन के साथ संपन्न कराया जाएगा।यह आयोजन काशी की अनूठी आध्यात्मिक परंपराओं में से एक माना जाता है।घाट पर निर्माण कार्य बना कारणअधिकारियों के मुताबिक, मणिकर्णिका घाट पर इस समय अत्याधुनिक शवदाह गृह के निर्माण सहित व्यापक कार्य चल रहा है। कई हिस्सों में बैरिकेडिंग की गई है और आवाजाही के मार्गों में बदलाव किया गया है।ऐसे में भारी भीड़ के आगमन से अव्यवस्था की आशंका को देखते हुए घाट पर आयोजन की अनुमति नहीं दी गई।सुरक्षा और सफाई पर विशेष फोकसनगर निगम द्वारा घाटों पर साफ-सफाई अभियान जारी है। पुलिस प्रशासन को भीड़ नियंत्रण की जिम्मेदारी सौंपी गई है। संवेदनशील स्थानों पर बैरिकेडिंग और अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती की गई है, जिनमें महिला पुलिसकर्मियों की भी मौजूदगी सुनिश्चित की गई है।परंपरा रहेगी, लेकिन सीमित दायरे मेंहालांकि घाट क्षेत्र में प्रतिबंध लगाया गया है, लेकिन मणिकर्णिका मंदिर परिसर में चिता भस्म की होली परंपरागत तरीके से आयोजित होगी।प्रशासन का कहना है कि सुरक्षा और श्रद्धालुओं की सुविधा को प्राथमिकता देते हुए यह निर्णय लिया गया है, ताकि आयोजन शांतिपूर्ण और व्यवस्थित ढंग से संपन्न हो सके।