वाराणसी।आध्यात्मिक नगरी काशी में कमिश्नरेट व्यवस्था लागू हुए लगभग पांच वर्ष बीत चुके हैं, लेकिन शहर को जाम की समस्या से अब तक स्थायी राहत नहीं मिल पाई है। ट्रैफिक सुधार के लिए बीते वर्षों में कई योजनाएं, अभियान और प्रयोग किए गए, मगर स्थिति यह है कि एक स्थान से जाम कम होता है तो वह दूसरी जगह स्थानांतरित हो जाता है।फोर्स और प्रयास बढ़े, चुनौती बनी रहीकमिश्नरेट व्यवस्था के बाद वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों और यातायात पुलिस बल की संख्या बढ़ाई गई। शहर के प्रमुख चौराहों और संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती भी की गई। इसके बावजूद ट्रैफिक दबाव पूरी तरह नियंत्रित नहीं हो सका।लंबे समय से प्रयोगों का दौरपिछले कई वर्षों से बनारस में वन-वे व्यवस्था, यू-टर्न, ई-रिक्शा और ऑटो पर आंशिक प्रतिबंध जैसे उपाय अपनाए जाते रहे हैं।मैदागिन–गोदौलिया, सोनारपुरा–गोदौलिया जैसे इलाकों में समय-समय पर नए ट्रैफिक प्रयोग लागू किए गए, लेकिन स्थायी समाधान अब भी तलाश का विषय बना हुआ है।फ्लाईओवर और रिंग रोड के बावजूद भीतर जामशहर में फ्लाईओवर, ROB, ब्रिज और आउटर रिंग रोड जैसे बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट पूरे किए गए। इनसे बाहरी यातायात का दबाव कुछ हद तक कम हुआ, लेकिन शहर के अंदर की संकरी सड़कों और भीड़भाड़ वाले बाजार क्षेत्रों में जाम की स्थिति जस की तस बनी हुई है।आबादी और पर्यटकों का दबाववाराणसी की आबादी लाखों में है और हर साल करोड़ों देशी-विदेशी पर्यटक यहां आते हैं। इस भारी आवागमन के मुकाबले पार्किंग सुविधाएं सीमित हैं, जिससे सड़क किनारे पार्किंग और अव्यवस्था जाम को और बढ़ा देती है।जाम के प्रमुख कारणप्रमुख इलाकों में सड़क पर पार्किंगपार्किंग स्थलों की कमीविकास परियोजनाओं के चलते खुदी सड़केंअतिक्रमण और अवैध वाहनों का संचालनVVIP मूवमेंटबिना पूर्व सूचना निर्माण कार्यसंकरी गलियां और नियमों का कमजोर पालनइन चौराहों पर सबसे ज्यादा दबावमैदागिन, गोदौलिया, लंका, रथयात्रा, सिगरा, कैंट, चौकाघाट, भेलूपुर, लहरतारा और पांडेयपुर—इन इलाकों में लगातार ट्रैफिक दबाव बना रहता है, जहां पुलिस को अतिरिक्त मशक्कत करनी पड़ती है।अब भी वही सवाललगातार योजनाओं, पुलिस बल की तैनाती और बुनियादी ढांचे के विस्तार के बावजूद क्या बनारस को जाम से स्थायी मुक्ति मिल पाएगी?या फिर काशी यूं ही ट्रैफिक प्रयोगों का शहर बनी रहेगी—यह सवाल आज भी कायम है।