वाराणसी में आपदा प्रबंधन को लेकर एक महत्वपूर्ण पहल के तहत एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम उत्तर प्रदेश राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण और जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के संयुक्त तत्वावधान में नागरिक सुरक्षा सभागार, चेतगंज में आयोजित हुआ।कार्यक्रम को संबोधित करते हुए अपर जिलाधिकारी Dr. Sadanand Gupta ने कहा कि आपदा प्रबंधन का मूल आधार पूर्व तैयारी, क्षमता निर्माण और समन्वित प्रतिक्रिया है। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि केवल बार-बार आने वाली आपदाओं ही नहीं, बल्कि कम घटित होने वाली लेकिन अधिक विनाशकारी आपदाओं के लिए भी तैयारी जरूरी है।उन्होंने वाराणसी में बाढ़ को प्रमुख आपदा बताते हुए कहा कि प्रशासन की तैयारी से इससे जनहानि सीमित रहती है, लेकिन डूबने की घटनाएं एक गंभीर और उपेक्षित समस्या बनकर सामने आई हैं। उन्होंने घाटों और जलाशयों के आसपास विशेष सावधानी बरतने की अपील की।अधिकारी ने यह भी स्पष्ट किया कि आपदा प्रबंधन केवल सरकारी जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि इसमें आम जनता, स्कूल-कॉलेज और स्वयंसेवी संगठनों की भागीदारी बेहद जरूरी है। सामुदायिक जागरूकता और प्रशिक्षण से ही आपदा के प्रभाव को कम किया जा सकता है।कार्यशाला में आगामी गर्मी के मौसम को देखते हुए हीट वेव और अग्निकांड की संभावनाओं पर भी चर्चा हुई। संवेदनशील वर्ग—बच्चे, बुजुर्ग और श्रमिक—के लिए विशेष तैयारी करने के निर्देश दिए गए।इस दौरान एनडीआरएफ के विशेषज्ञ राहुल वर्मा ने डूबने और सर्पदंश से बचाव के उपायों की जानकारी दी। उन्होंने सर्पदंश की स्थिति में झाड़-फूंक के बजाय तुरंत अस्पताल में इलाज कराने की सलाह दी।कार्यक्रम में विभिन्न विभागों के अधिकारी, आपदा विशेषज्ञ और कर्मचारी मौजूद रहे, जहां आपदा के समय समन्वय, बचाव और राहत कार्यों को और प्रभावी बनाने पर चर्चा की गई।