काशी के ऐतिहासिक मणिकर्णिका घाट पर चल रहे पुनर्विकास कार्य के दौरान विवाद खड़ा हो गया है। निर्माण कार्य के बीच 300 साल पुरानी मणि और प्राचीन मूर्ति टूटने के आरोप सामने आने के बाद पाल समाज के लोग मौके पर पहुंच गए और नाराजगी जताई।घाट पर कार्यदायी संस्था द्वारा हाइड्रा मशीन से पक्के घाट के पत्थर हटाए जा रहे थे, जिन्हें ट्रैक में लोड कर नाव के जरिए गंगा पार भेजा जा रहा है। इसी दौरान मणि के क्षतिग्रस्त होने का वीडियो सामने आया, जिसके बाद विरोध शुरू हो गया।क्या बोले विरोध करने वाले लोगस्थानीय निवासी संजय मिश्रा ने आरोप लगाया कि जिस मणि की देखरेख उनका परिवार वर्षों से करता आ रहा था, उसे बिना सूचना गिरा दिया गया। उन्होंने कहा कि मणि के भीतर अहिल्याबाई होल्कर की मूर्ति और एक शिवलिंग स्थापित था, जिसे तोड़ दिया गया। उन्होंने प्रशासन से मणि और मूर्तियों को पुनः स्थापित करने की मांग की।वहीं मयंक पाल ने कहा कि पाल समाज इस घटना से आहत है। यदि मूर्तियों को पुनः स्थापित नहीं किया गया तो बड़ा आंदोलन किया जाएगा। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस ने मौके से लोगों को हटा दिया, जबकि वहां प्राचीन विरासत को नुकसान पहुंचा है।प्रशासन ने संभाला मोर्चाविरोध की सूचना पर डीसीपी, एसीपी, एडीसीपी और एडीएम सिटी मौके पर पहुंचे।एडीएम सिटी ने स्पष्ट किया कि कोई मंदिर नहीं तोड़ा गया है, मणि के अंदर मूर्ति होने की बात सामने आई है, जिसकी जांच की जा रही है। उन्होंने कहा कि फिलहाल स्थिति नियंत्रण में है और बाहरी लोगों को समझाकर वापस भेज दिया गया।क्या है मणिकर्णिका पुनर्विकास प्रोजेक्ट* सीएसआर फंड से 18 करोड़ रुपये की लागत* कुल 29,350 वर्ग मीटर क्षेत्र में निर्माण* दलदली मिट्टी के कारण 15–20 मीटर गहरी पाइलिंग* जी+1 मॉडल पर घाट का विकास* बाढ़ से सुरक्षा के लिए विशेष तकनीककैसा होगा नया मणिकर्णिका घाट* 25 मीटर ऊंची चिमनी (राख के प्रसार को रोकने के लिए)* 18 खुले दाह संस्कार प्लेटफॉर्म* 5 कवर दाह संस्कार बर्थ* पवित्र जलकुंड, प्रतीक्षा कक्ष, पंजीकरण कक्ष* लकड़ी भंडारण क्षेत्र, अपशिष्ट ट्रॉलियां* सामुदायिक शौचालय व मुंडन क्षेत्र* चुनार और जयपुर के पत्थरों से निर्माणकाम में आई तेजीकरीब 19 महीने पहले शुरू हुआ यह प्रोजेक्ट बाढ़ के कारण लंबे समय तक रुका रहा। वर्ष 2023 में पीएम मोदी द्वारा शिलान्यास के बाद अब एक बार फिर कार्य में तेजी लाई गई है।फिलहाल मामला जांच के दायरे में है और स्थानीय आस्था बनाम विकास को लेकर बहस तेज हो गई है।