वाराणसी |फर्जी भारतीय पासपोर्ट व पहचान पत्र बनवाकर भारत में अवैध रूप से रह रहे बांग्लादेशी नागरिक को वाराणसी न्यायालय से बड़ा झटका लगा है। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश (द्वितीय) अवधेश कुमार ने अभियुक्त होलमांग सिंह मार्मा की जमानत प्रार्थना पत्र खारिज कर दी।अभियोजन पक्ष की ओर से रोहित मौर्य (सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता, फौजदारी) ने जमानत का कड़ा विरोध किया।क्या है पूरा मामलाअभियोजन के अनुसार, वादी मुकदमा उपनिरीक्षक रितेश कुमार सिंह को एटीएस से सूचना प्राप्त हुई थी कि कुछ बांग्लादेशी नागरिक थाना सारनाथ क्षेत्र में अवैध रूप से रह रहे हैं और उन्होंने फर्जी तरीके से भारतीय पासपोर्ट, आधार कार्ड और पैन कार्ड बनवा रखे हैं।सूचना के आधार पर पुलिस टीम ने मुखबिर की मदद से सारनाथ संग्रहालय के पास गोल्डन डियर हैंडीक्राफ्ट दुकान के सामने एक संदिग्ध व्यक्ति को रोका। पूछताछ में उसने अपना नाम मग फू मोंग बताया और तलाशी के दौरान उसके पास से-भारतीय पासपोर्टआधार कार्डपैन कार्डमोबाइल फोनतथा बांग्लादेश की पहचान पत्र की छायाप्रतिबरामद हुई। बांग्लादेशी आईडी पर अभियुक्त का असली नाम होलमांग सिंह मार्मा अंकित था।पूछताछ में चौंकाने वाला खुलासाअभियुक्त ने स्वीकार किया कि वह बांग्लादेश का निवासी है और लगभग 12 वर्ष पूर्व अवैध रूप से मिजोरम के रास्ते भारत आया था। उसने असम, बिहार और कर्नाटक में रहकर फर्जी भारतीय दस्तावेज तैयार कराए और उन्हीं के आधार पर भारतीय पासपोर्ट बनवाया। इसी पासपोर्ट के जरिए वह म्यांमार व भारत के बीच आता-जाता रहा और वहीं शादी भी की।कानूनी कार्रवाईपुलिस द्वारा अभियुक्त के खिलाफ थाना सारनाथ मेंभारतीय न्याय संहिता (BNS),विदेशी अधिनियम औरपासपोर्ट अधिनियम की विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया।न्यायालय ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अभियुक्त होलमांग सिंह मार्मा की जमानत प्रार्थना पत्र निरस्त कर दी।