अयोध्या। ( धर्मेंद्र कुमार सिंह) : बड़े भक्तमाल मंदिर के संस्थापक महंत श्री रामशरण दास जी महाराज के 50वें साकेतोत्सव के अवसर पर रविवार को धर्मनगरी अयोध्या में भक्ति और श्रद्धा का अद्भुत संगम देखने को मिला। इस अवसर पर मां सरयू को चुनरी अर्पित करने के लिए भव्य शोभायात्रा निकाली गई, जिसमें सैकड़ों साधु-संत और भक्तजन शामिल हुए।मंदिर के बड़े महंत कौशल किशोर दास महाराज के सानिध्य और वर्तमान महंत अवधेश कुमार दास महाराज के संयोजन में यह शोभायात्रा बड़े भक्तमाल मंदिर से प्रारंभ हुई। हनुमानगढ़ी के शाही निशान, बैंड-बाजों और दर्जनों सजे-धजे रथों के साथ शोभायात्रा जब नगर भ्रमण पर निकली तो पूरा अयोध्या धाम भक्तिमय हो उठा।शोभायात्रा हनुमानगढ़ी, श्रृंगारहाट और लता मंगेशकर चौक से होते हुए मां सरयू के पावन तट तक पहुँची। तट पर सर्वप्रथम शाही निशान का पूजन किया गया, इसके बाद मां सरयू का सवा कुंटल दूध से अभिषेक किया गया। संत-महंतों ने फल-फूल अर्पित कर आरती उतारी और सामूहिक रूप से मां सरयू को चुनरी अर्पित की।हनुमानगढ़ी के नागा संतों ने इस अवसर पर अपने अद्भुत करतबों से श्रद्धालुओं का मन मोह लिया। पूरा वातावरण ‘जय श्रीराम’ और ‘हरिनाम संकीर्तन’ से गुंजायमान रहा।महंत अवधेश कुमार दास महाराज ने कहा कि बड़े भक्तमाल महाराज के आशीर्वाद से आश्रम में निरंतर सेवा कार्य चल रहे हैं। प्रतिवर्ष सरयू माता को चुनरी अर्पित की जाती है, किंतु इस वर्ष 50वां साकेतोत्सव होने के कारण यह आयोजन विशेष रूप से महत्वपूर्ण रहा। उन्होंने बताया कि पंचकोसी परिक्रमा के दौरान भगवान श्रीराम की सेवा करने वाले भक्तों को प्रतिदिन सम्मानित किया जा रहा है।जगतगुरु रामानुजाचार्य स्वामी राघवाचार्य जी ने कहा कि बड़े भक्तमाल महाराज साधारण संत नहीं थे, वे सेवा और भजन में सदैव लीन रहते थे। उनके 50वें साकेतोत्सव पर अयोध्यावासियों की सेवा होना गर्व का विषय है।संत संजय दास ने कहा कि महंत रामशरण दास जी महाराज के इस साकेतोत्सव ने अयोध्या को आनंदमय बना दिया है। मां सरयू को चुनरी अर्पित कर संत समाज ने वर्षों पुरानी परंपरा को आगे बढ़ाया है।पूरे आयोजन में सैकड़ों संत-महंत, भक्तगण और श्रद्धालु मौजूद रहे। श्रीराम नाम की गूंज के साथ अयोध्या धाम में भक्ति का सागर उमड़ पड़ा।