धनबाद : झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) ने 4 फरवरी को अपने 54वें स्थापना दिवस को भव्य रूप से मनाया। इस खास अवसर पर मुख्यमंत्री और झामुमो के राष्ट्रीय अध्यक्ष हेमंत सोरेन ने न केवल पार्टी की स्थापना की याद दिलाई, बल्कि राज्य में बढ़ती सामाजिक एकता और समरसता का जोरदार संदेश भी दिया।हेमंत सोरेन ने सभी आदिवासी, दलित, मजदूर और बाहर से आए हुए झारखंडवासियों को एक परिवार बताते हुए कहा, “अब समय आ गया है कि हम ‘दिकू’ और ‘मूलवासी’ जैसे भेदभाव भरे शब्दों को भूलकर एक साथ झारखंड की खुशहाली के लिए काम करें। झारखंडी होने का मतलब है, अपनत्व और भाईचारा।”उन्होंने कहा कि झामुमो की स्थापना 4 फरवरी 1973 को धनबाद में हुई थी और तब से यह पार्टी झारखंड के लिए संघर्ष, न्याय और सांस्कृतिक गौरव की प्रतीक रही है। “हमारे लिए ‘जोहार’ केवल अभिवादन नहीं, बल्कि एक सामाजिक समझौता है, जो पूरी दुनिया में अब सम्मानित हो रहा है। चाहे लंदन हो या दिल्ली, लोग ‘जोहार’ बोल रहे हैं। यह झारखंड की पहचान है।”हेमंत सोरेन ने आदिवासी नेता और दिशोम गुरु स्वर्गीय शिबू सोरेन को याद करते हुए कहा, “उनकी वैचारिक विरासत और संघर्षशील परंपरा हमें हमेशा प्रेरित करती रहेगी। उन्होंने आदिवासी, दलित और मजदूर वर्ग के लिए जो रास्ता दिखाया, उसे हम पूरी ताकत से आगे बढ़ाएंगे।”कार्यक्रम में झामुमो के कई वरिष्ठ नेता और हजारों कार्यकर्ता शामिल हुए, जिन्होंने जमकर नारे लगाए और संगठन को और मजबूत करने का संकल्प लिया। आयोजन में आदिवासी नृत्य, गीत और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने उत्सव की भव्यता को चार चांद लगा दिए।इस मौके पर हेमंत सोरेन ने भविष्य की चुनौतियों का भी जिक्र किया और कहा कि झारखंड की सरकार जनहित, सामाजिक न्याय और विकास को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है। उन्होंने कहा कि झामुमो सभी वर्गों को साथ लेकर ही राज्य को प्रगति के रास्ते पर ले जाएगा।