धनबाद : आर्ट ऑफ लिविंग के 45वें वर्ष की ऐतिहासिक शिवरात्रि पर श्रद्धालुओं को मूल सोमनाथ ज्योतिर्लिंग के प्राचीन अवशेषों के दुर्लभ दर्शन हुए।एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर संस्था के झारखंड मीडिया प्रभारी अजय मुखर्जी ने जानकारी दी।आर्ट ऑफ लिविंग के अंतर्राष्ट्रीय केंद्र बेंगलुरु में आयोजित इस भव्य महोत्सव के समापन के साथ ही श्रद्धालु अपने साथ एक अविस्मरणीय, आत्मानुभूति से परिपूर्ण संध्या की स्मृतियाँ लेकर लौटे।इस अवसर पर गुरुदेव ने कहा, “महाशिवरात्रि वह अवसर है जब आत्मा भौतिक जगत से ऊपर उठकर किसी सूक्ष्म, दिव्य लोक का स्पर्श करती है। शिव प्रत्येक कण में विद्यमान हैं। हमारी चेतना का स्वभाव ही शिव है। शिव में निमग्न होना भक्ति है, और प्रत्येक में शिव को देखना सेवा है। जो अविनाशी है, वह हमारे भीतर ही है। यदि हमें इतना भी विश्वास हो जाए, तो जीवन में किसी अभाव का स्थान नहीं रहता। कहा जाता है कि जो प्रेम और श्रद्धा से शिवरात्रि का अनुष्ठान करता है, उसकी सभी कामनाएँ स्वयं ही पूर्ण हो जाती हैं।”महाकाल की अभिव्यक्ति पर उन्होंने कहा, “वह योगियों के हृदय में ज्योति बनकर प्रकाशित होते हैं।”यह रुद्र पूजा भारत सहित कनाडा, दुबई, जर्मनी और विश्व के 150 से अधिक अन्य स्थलों पर भी एक साथ संपन्न हुई।आश्रम में इस वर्ष का उत्सव विशेष रूप से ऐतिहासिक बन गया, क्योंकि श्रद्धालुओं को हाल ही में प्राप्त मूल सोमनाथ ज्योतिर्लिंग के प्राचीन अवशेषों के दुर्लभ दर्शन का सौभाग्य मिला। माना जाता है कि 1026 ईस्वी में महमूद गजनी के आक्रमण में यह ज्योतिर्लिंग ध्वस्त कर दिया गया था।दिन भर में तीन लाख से अधिक श्रद्धालुओं को महाप्रसाद परोसा गया, जिसकी तैयारी के लिए 15 टन से अधिक सब्ज़ियों का उपयोग हुआ और हजारों स्वयंसेवकों ने सेवा-भाव से योगदान दिया। आश्रम में इस पावन अवसर पर वैदिक रीति से अनेक विवाह संस्कार भी गुरुदेव की उपस्थिति में सम्पन्न हुए।